छत्तीसगढ

Voter List Controversy : रानी विभा सिंह vs पद्मा सिंह…! SIR प्रक्रिया को लेकर टकराव…! तलाकशुदा के साथ वर्तमान में भी किसी अन्य की पत्नी…मतदाता सूची में फिर से राजा देवव्रत सिंह की पत्नी का दर्जा दोहराया…यहां सुनिए VIDEO

खैरागढ़, 08 जनवरी। Voter List Controversy : राजनैतिक और प्रशासनिक विवाद के बीच खैरागढ़ में एक पुराना मतदाता विवाद फिर से उजागर हुआ है। मामला तब सामने आया जब रानी विभा सिंह ने 30 दिसंबर 2025 को कलेक्टर खैरागढ़ कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के दौरान दिवंगत पूर्व विधायक और सांसद राजा देवव्रत सिंह की वैवाहिक स्थिति को लेकर गंभीर त्रुटि हुई है।

शिकायत में रानी विभा सिंह ने कहा कि राजा देवव्रत सिंह की तलाकशुदा पूर्व पत्नी पद्मा सिंह, जो वर्तमान में नितिन पंत की पत्नी हैं, उन्हें मतदाता सूची में फिर से राजा देवव्रत सिंह की पत्नी के रूप में दर्ज कर दिया गया। जबकि तलाक के बाद उनका विवाह रानी विभा सिंह से हुआ था।

इस मामले पर 1 जनवरी 2026 को कलेक्टर कार्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि SIR प्रक्रिया में कोई लापरवाही नहीं हुई। कलेक्टर कार्यालय ने स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार विशेष गहन पुनरीक्षण पूरी तरह पारदर्शी ढंग से किया गया है। वर्ष 2003 और 2025 की मतदाता सूचियों का मिलान कर 23 दिसंबर 2025 को प्रारंभिक सूची प्रकाशित की गई थी, और उसी आधार पर एकीकृत मतदाता सूची तैयार की गई।

विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि यदि किसी प्रविष्टि पर आपत्ति है, तो 23 दिसंबर 2025 से 22 जनवरी 2026 के बीच निर्धारित प्रारूप और दस्तावेजी साक्ष्य के साथ दावा-आपत्ति प्रस्तुत की जा सकती है। इसके बाद निर्वाचन नियम 1960 के तहत कार्रवाई होगी।

तहसील ने सुनवाई की तय

हालांकि, कलेक्टर कार्यालय के खंडन के बावजूद मामला यहीं नहीं थमा। 5 जनवरी 2026 को तहसीलदार छुईखदान ने दोनों पक्षों को 14 जनवरी 2026 को समस्त दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने का नोटिस जारी किया। इससे स्पष्ट हो गया कि प्रशासनिक स्तर पर मामले की औपचारिक सुनवाई शुरू हो चुकी है।

14 जनवरी की सुनवाई

फिलहाल प्रशासन का रुख यह है कि SIR प्रक्रिया निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पारदर्शी ढंग से की जा रही है। तहसील स्तर पर जारी नोटिस के बाद सभी की निगाहें 14 जनवरी की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां दस्तावेजों के आधार पर तय होगा कि मामला केवल आपत्ति प्रक्रिया का हिस्सा है या किसी स्तर पर वास्तविक चूक हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम ने खैरागढ़ राजपरिवार से जुड़ा पुराना विवाद फिर से सतह पर ला दिया है। राजा देवव्रत सिंह के निधन के बाद से ही उनकी पत्नी रानी विभा सिंह और पूर्व पत्नी पद्मा सिंह के बीच दस्तावेजों और अधिकारों को लेकर मतभेद सामने आते रहे हैं। इस विवादित मतदाता प्रविष्टि ने अब इसे प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रिया से भी जोड़ दिया है।

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