छत्तीसगढ

Arms Act : वीरेंद्र सिंह तोमर को बड़ी राहत…! रायपुर कोर्ट से मिली सशर्त जमानत…बचाव पक्ष की ये दलीलें आई काम VIDEO

रायपुर, 07 जनवरी। Arms Act : पुरानी बस्ती थाना क्षेत्र में दर्ज आर्म्स एक्ट के एक मामले में आरोपी वीरेंद्र सिंह तोमर को जिला एवं सत्र न्यायालय रायपुर से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत दर्ज प्रकरण में वीरेंद्र सिंह तोमर की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब अभियुक्त के सशर्त जमानत पर रिहा होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वीरेंद्र सिंह तोमर के विरुद्ध अवैध हथियार रखने के आरोप में आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत मामला दर्ज किया गया था। प्रकरण दर्ज होने के बाद आरोपी फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने बाद में ग्वालियर से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के पश्चात उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया था। लंबे समय से जेल में निरुद्ध रहने के बाद आरोपी की ओर से रायपुर न्यायालय में जमानत आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे सुनवाई उपरांत स्वीकार कर लिया गया।

बचाव पक्ष की दलील

अभियुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता फैजल रिजवी एवं शशांक मिश्रा ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि वीरेंद्र सिंह तोमर को झूठे एवं मनगढ़ंत आरोपों में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा जिस अवैध हथियार की बरामदगी दिखाई गई है, वह प्रथम दृष्टया संदेहास्पद है और उसके समर्थन में कोई ठोस व विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि अभियुक्त जांच और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करने को तैयार है तथा जमानत पर रिहा होने के बाद न तो फरार होगा और न ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा।

अभियोजन पक्ष का विरोध

वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आर्म्स एक्ट के अंतर्गत दर्ज अपराध गंभीर प्रकृति के होते हैं और ऐसे मामलों में समाज की सुरक्षा का प्रश्न जुड़ा होता है। अभियोजन ने यह भी आशंका जताई कि आरोपी साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को पर्याप्त मजबूत नहीं पाया और आरोपी को जमानत प्रदान कर दी।

कोर्ट ने लगाईं दो शर्तें

न्यायालय ने वीरेंद्र सिंह तोमर को जमानत देते हुए दो प्रमुख शर्तें निर्धारित की हैं। पहली शर्त के अनुसार अभियुक्त को नियमित रूप से न्यायालय में उपस्थित रहना होगा और ट्रायल की कार्यवाही में पूर्ण सहयोग करना होगा। दूसरी शर्त यह है कि अभियुक्त किसी भी प्रकार से मामले के साक्ष्यों को प्रभावित नहीं करेगा तथा न ही गवाहों को डराने-धमकाने या प्रलोभन देने का प्रयास करेगा। शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में जमानत निरस्त की जा सकती है।

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