Folk Festival Cherchera : दान, समरसता और लोक संस्कृति का जीवंत उत्सव…! परंपरा निभाते दिखे मंत्री टंक राम वर्मा…घर-घर जाकर किया अन्न दान ग्रहण

रायपुर, 03 जनवरी। Folk Festival Cherchera : छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक परंपराओं में विशेष स्थान रखने वाले छेरछेरा तिहार के अवसर पर राज्य के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी में पारंपरिक रूप से घर-घर जाकर अन्न दान ग्रहण किया। इस अवसर पर पूरे गांव में उत्साह, अपनत्व और लोक उल्लास का वातावरण देखने को मिला।

छेरछेरा तिहार पर अन्न दान की अनूठी परम्परा
मंत्री वर्मा ने ग्रामीणों से आत्मीय भेंट कर छेरछेरा की परंपरा का निर्वहन किया और अन्न दान स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है, जो समाज में समानता, सहयोग और दान की भावना को सशक्त करता है। यह लोक पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हुए सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि छेरछेरा केवल अन्न संग्रह का पर्व नहीं, बल्कि यह लोक संस्कृति, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है। छत्तीसगढ़ की लोक परंपराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें सहेजकर रखना हम सभी का दायित्व है। ऐसे पर्व समाज को जोड़ते हैं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराते हैं।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक उल्लास के साथ मंत्री का स्वागत किया। गांव में छेरछेरा तिहार की रौनक देखते ही बन रही थी। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ इस लोक पर्व में सहभागिता निभाई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि छेरछेरा छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय पारंपरिक लोक पर्व है, जिसे धान कटाई के बाद पौष मास (दिसंबर–जनवरी) में मनाया जाता है। यह पर्व राज्य की कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। फसल कटने के उपरांत किसान ईश्वर और समाज के प्रति कृतज्ञता प्रकट करता है।
दिखी भाईचारे की भावना
छेरछेरा मूल रूप से दान, सहयोग और आपसी भाईचारे का पर्व है। इस दिन गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग टोली बनाकर घर-घर जाते हैं और लोकगीत गाते हुए अन्न या दान मांगते हैं। दरवाजे पर पहुंचकर ‘छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरा…’
का गायन किया जाता है, जिसका भाव यह है कि माता के भंडार में भरपूर धान है, उसमें से थोड़ा दान प्रदान किया जाए।
एकत्रित सामग्री का उपयोग सामूहिक भोज, जरूरतमंदों की सहायता और सामाजिक कार्यों में किया जाता है। यह पर्व अमीर-गरीब तथा जाति-धर्म के भेद को मिटाकर सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ाता है और नई पीढ़ी को साझा संस्कृति एवं लोक परंपराओं से जोड़ता है।
छेरछेरा तिहार के माध्यम से एक बार फिर छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं की जीवंत झलक देखने को मिली, जिसने सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का सशक्त संदेश दिया।





