छत्तीसगढ

Excise Policy : छत्तीसगढ़ ने अब प्लास्टिक की बोतलों में शराब बेचने का किया फैसला…! एक्साइज विभाग ने लिया बड़ा फैसला…यहां देखें

रायपुर, 21 जनवरी। Excise Policy : छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने आज अहम निर्णय लेते हुए आबकारी नीति वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। साथ ही, आबकारी विभाग को संबंधित कार्यवाहियों के लिए अधिकृत किया गया है। इस नीति के तहत शराब के रेट घटाने, तस्करी रोकने और प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाएगा।

शराब के रेट में कमी और तस्करी रोकने पर ध्यान

आबकारी विभाग पड़ोसी राज्यों से शराब की तस्करी रोकने के लिए शराब की कीमतों को कम करने पर विचार कर रहा है। खासकर देशी और विदेशी शराब के रेट घटाए जाएंगे, ताकि छत्तीसगढ़ में शराब की कीमतें पड़ोसी राज्यों जैसे ओडिशा के बराबर हो सकें। इसके अलावा, आबकारी विभाग को फ्री हैंड देते हुए कैबिनेट ने इस फैसले को मंजूरी दी है।

प्लास्टिक बोतल का इस्तेमाल

शराब की कीमत घटाने के लिए अब कांच की बोतल के बजाय प्लास्टिक की बोतलें इस्तेमाल की जाएंगी। इससे शराब की पैकेजिंग में लागत कम होगी। खासकर पौवा (180 मि.ली.) और अध्धा (375 मि.ली.) बोतलों में प्लास्टिक की बोतलें इस्तेमाल की जाएंगी। इसके अलावा, नीचे लेवल की अंग्रेजी शराब की बोतलें भी अब प्लास्टिक में बिकेंगी। इससे छत्तीसगढ़ शराब की कीमतों को पड़ोसी राज्यों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बना पाएगा।

मिनीएचर शराब की बोतलें

छत्तीसगढ़ के मदिरा प्रेमियों के लिए अब मिनीएचर शराब की बोतलें उपलब्ध कराने की भी योजना बनाई जा रही है। ये छोटी बोतलें खासकर ट्रैवल के लिए उपयुक्त होंगी, और फ्लाइट्स में भी उपयोग की जा सकेंगी। इन मिनीएचर बोतलों में दो पैग के बराबर शराब होगी, जो यात्रा के दौरान बेहद सुविधाजनक साबित होगी।

एयरपोर्ट पर बार की स्थापना

कैबिनेट के फैसले के बाद, आबकारी विभाग रायपुर एयरपोर्ट पर बार स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए एयरपोर्ट में उचित स्थान की तलाश की जा रही है, ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके।

प्लास्टिक बोतल के फायदे

  • कम वजन (Lightweight) : कांच की बोतल के मुकाबले प्लास्टिक की बोतलें हल्की होती हैं, जिससे परिवहन में लागत और ईंधन की बचत होती है।
  • टूटने का डर नहीं (Shatterproof) : प्लास्टिक की बोतलें गिरने पर टूटती नहीं हैं, जिससे शिपिंग और हैंडलिंग में नुकसान कम होता है।
  • कम लागत (Cost-effective) : प्लास्टिक बोतलें कांच के मुकाबले सस्ती होती हैं, जिससे पैकेजिंग लागत घटती है।
  • सुविधाजनक (Convenience) : हल्की और अटूट होने के कारण इन्हें ट्रैकिंग, पिकनिक या यात्रा के दौरान ले जाना आसान होता है।
  • पुनर्चक्रण (Recyclable) : PET बोतलें पूरी तरह से पुनर्चक्रण योग्य होती हैं।
  • कार्बन फुटप्रिंट में कमी : हल्के वजन के कारण परिवहन में कम कार्बन उत्सर्जन होता है, जो पर्यावरण के लिहाज से बेहतर होता है।

हालांकि, लंबे समय तक भंडारण के लिए कांच को बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह शराब के स्वाद और गुणवत्ता को अधिक समय तक सुरक्षित रखता है।

मंत्रिपरिषद के इस फैसले से छत्तीसगढ़ में शराब की कीमतों (Excise Policy) में कमी आएगी और प्लास्टिक बोतल के इस्तेमाल से लागत में भी काफी गिरावट आएगी। इससे राज्य में शराब का वितरण और बिक्री प्रणाली बेहतर और सस्ता होगा, साथ ही यह कदम तस्करी की समस्या को भी हल करने में मदद करेगा।

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