छत्तीसगढ

Police Protocol : वर्दी की मर्यादा…! रायपुर में इंस्पेक्टर के व्यवहार पर उठे सवाल…पहले सैल्यूट किया फिर जूता और टोपी उतारकर पंडित धीरेंद्र शास्त्री के छुए पैर…यहां देखें वायरल VIDEO

रायपुर, 25 दिसंबर। Police Protocol : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक पुलिस इंस्पेक्टर का वर्दी में बाबा के पैर छूते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो रायपुर के माना स्थित स्टेट हैंगर का बताया जा रहा है, जिसकी अवधि करीब 57 सेकेंड है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की पेशेवर आचरण, निष्पक्षता और वर्दी की गरिमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्र शास्त्री भिलाई में आयोजित अपने 5 दिवसीय कथा के लिए रायपुर पहुंचे। वे छत्तीसगढ़ सरकार के राजकीय विमान से कौशल विकास मंत्री गुरू खुशवंत के साथ रायपुर पहुंचे

जानकारी के मुताबिक बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 25 से 29 दिसंबर तक दुर्ग जिले के भिलाई नगर में हनुमान कथा का आयोजन कर रहे हैं। इसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पंडित शास्त्री चार्टर प्लेन से रायपुर के माना स्टेट हैंगर पहुंचे थे। उन्हें रिसीव करने के लिए मंत्री खुशवंत साहेब भी मौके पर मौजूद थे।

वीडियो में देखा जा सकता है कि चार्टर प्लेन से पहले मंत्री खुशवंत साहेब उतरते हैं, जिन्हें ड्यूटी पर तैनात माना टीआई मनीष तिवारी द्वारा नियमानुसार सैल्यूट किया जाता है, लेकिन जैसे ही बाबा बागेश्वर धाम उतरते हैं, उसी इंस्पेक्टर द्वारा जूता और टोपी उतारकर न केवल सैल्यूट किया जाता है, बल्कि उनके पैर भी छुए जाते हैं।

यहीं से विवाद शुरू होता है। क्योंकि पुलिस नियमों और प्रोटोकॉल के अनुसार, ड्यूटी के दौरान वर्दी में तैनात पुलिसकर्मी का आचरण पूरी तरह तटस्थ, अनुशासित और औपचारिक होना चाहिए। धार्मिक, राजनीतिक या व्यक्तिगत आस्था के प्रदर्शन के रूप में किसी व्यक्ति के पैर छूना या इस तरह का व्यवहार पुलिस सेवा नियमों की भावना के विपरीत माना जाता है।

सवाल तो उठ रहे है

  • क्या ड्यूटी के दौरान वर्दी में किसी धार्मिक गुरु के पैर छूना उचित है?
  • क्या इससे पुलिस की निष्पक्षता और धर्मनिरपेक्ष छवि प्रभावित नहीं होती?
  • क्या आम नागरिकों के सामने यह संदेश नहीं जाता कि कानून से ऊपर आस्था या प्रभावशाली व्यक्ति हैं?

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर आम लोग और कई सामाजिक संगठनों ने भी नाराजगी जाहिर की है। लोगों का कहना है कि पुलिस वर्दी किसी व्यक्ति विशेष की श्रद्धा का प्रदर्शन करने के लिए नहीं, बल्कि कानून और संविधान के पालन का प्रतीक है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस विभाग और वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत आस्था मानकर नजरअंदाज किया जाएगा, या फिर वर्दी की मर्यादा भंग करने के आरोप में कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

फिलहाल, यह वीडियो एक बार फिर यह बहस छेड़ (Police Protocol) गया है कि आस्था और पद की जिम्मेदारी के बीच की रेखा कितनी स्पष्ट और सख्ती से खींची जानी चाहिए।

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